Saturday, November 6, 2010

soch kar batlaana tum mujhko ek din..................

सोच कर बतलाना तुम मुझको एक दिन
क्या रह सकोगी तुम ,एक पल भी मेरे बिन

जब ना रहूँगा मै,तो क्या करोगी तुम
चाहोगी तन्हाई या उस से डरोगी तुम

मेरी यादों से बचोगी या उनमें बहोगी तुम
गर मुझको करोगी याद तो कैसे रहोगी तुम

ख़्वाबों में जब मै आऊँगा तो क्या कहोगी तुम
सब कुछ बताओगी या चुप ही रहोगी तुम

चाहे रहूँ मै दूर,आँखों में बसोगी तुम
छलकेंगी वो ख़ुशी से,जब भी हंसोगी तुम

प्यार बन के दिल में मेरे पलोगी तुम
हर सफ़र पे मेरे संग-संग चलोगी तुम

जब हमारे कल के सपने बनोगी तुम
तब दूँगा मै आवाज़, क्या सुनोगी तुम

हालात से लड़ोगी या फिर झुकोगी तुम
मेरे लौट आने तक क्या रुकोगी तुम

मै जानता हूँ,मेरा रास्ता तकोगी तुम
ये काम थोडा मुश्किल है,क्या कर सकोगी तुम

सोच कर बतलाना ......................

Saturday, July 3, 2010

सबने दोपहर के लिए..........

सवाल-ए-इश्क सुन के मेरा तुमने पलकें झुका रखी हैं
मै आगे बढूँ भी तो कैसे ,बीच रस्ते तुम्हारी हया रखी है

जबाँ का साथ नहीं देती हैं नज़रें तुम्हारी
कौन सी बात तुमने दिल में दबा रखी है

खुदा मशगूल* है , फुर्सत मिले तो अर्ज़ करूँ
अरसे से हमारे होठों पे एक दुआ रखी है

सुबह की धूप में झुलस गए बदन सब के
सबने दोपहर के लिए छाँव बचा रखी है

*-busy

Friday, June 11, 2010

Show must go on.....................

माना तेरे आने से थी बदली मेरी ज़िन्दगी
पर ताज्जुब कि तेरे जाने से कोई फर्क नहीं है
होने से तेरे जन्नत बनी थी मेरी दुनिया
लेकिन तेरे न होने से ये नर्क नहीं है

माना कि ज़िन्दगी में अब प्यार नहीं है
पर ख्यालों के समंदर में उतार नहीं है
अब भी मेरी ग़ज़लों में बहुत जान बाकी है
अब भी मेरी कलम की धार वही है

खाली है ज़िन्दगी मगर कोई ख्वाइश नहीं है
सुकून से हूँ,खुदा से कोई फरमाइश नहीं है
सिगरेट के धुएँ से दिल भरा भरा है
अब किसी के लिए इस में कोई गुंजाइश नहीं है

सच है,आँखों में सपनों का कोई महल नहीं है
अच्छा ही है,नींद में कोई खलल नहीं है
अब चलती है मेरी ज़िन्दगी,मेरे हिसाब से
किसी और का इसमें कोई भी दखल नहीं है

Monday, May 24, 2010

ऐसे ही पहली बार छुआ था मैंने तुम्हारे हाथों को.........

जैसे सुबह की पहली किरण छूती है
किसी सोते बच्चे की पलकों को,

जैसे ढलते सूरज की किरणें छूती हैं
शाम के धुंधलकों को ,

जैसे बहते हुए आंसू छूते हैं
होठों के किनारे को,

जैसे कोई नन्हा गुमशुदा बादल
छूता है किसी चमकते सितारे को,

जैसे किसी की दुआ छूती है
दिल के जज्बातों को,

ऐसे ही पहली बार छुआ था
मैंने तुम्हारे हाथों को

Friday, May 21, 2010

अनगिनत सवालों की,जवाबों की
मेरे पास एक दुनिया है मेरे ख़्वाबों की

मेरे खवाब मेरी दुनिया के बाशिंदे हैं
वहां पर्वत हैं ,बादल हैं और परिंदे हैं
और हाँ, एक नदी भी है गुलाबो की

वो फूलों की और तितलियों की दुनिया है
वहाँ पास में बहता हुआ एक शहद का दरिया है
रौशनी के पेड़ों की ,खुशबूओं के बागों की

मेरे पास एक दुनिया है मेरे ख़्वाबों की

nahi chaahiye khudaa........

जाने कैसा ये खुदा तुम्हारा है
जब भी मैंने इसे दिल से पुकारा है
ये बहरा बन जाता है
मै घुटनों पे झुकता हूँ
तो ये तन जाता है
ये किसी के कर्मो का हिसाब नहीं लिखता
मत रखो कोई ग़लतफ़हमी
ये अंधा है इसे कुछ नहीं दिखता
चलो, है कही तुम्हारा भगवान् मान लो
तो उसने आज तक क्या दिया इंसान को
संसार में जो इतने दुःख हैं ,इतने आंसू हैं,इतनी मारामारी है
ये किसकी जिम्मेवारी है
अरे भगवान्,तुम शुक्र मानो इन बेवकूफ इंसानों का
जो अपने सारे अच्छे कर्मो,सारे लाभों को झट तुम्हारे खाते में डालता है
और अपनी सारी बुराइयों ,सारे जख्मो का बोझ खुद संभालता है
दिन-रात तुम्हारी जलाई भट्टी में तपता है
फिर भी तुम्हारा नाम जपता है
तुम्हारा अस्तित्व हमसे है,तुम क्यूँ ये बात भूल जाते हो
हम तुम्हे बनाते हैं
ना कि तुम हमे बनाते हो
और ये जो तुम इतराते हो
और दिखते हो सख्त से
हेकड़ी सारी हवा हो जायेगी
जिस दिन हम उतार देंगे तख़्त से

Monday, May 3, 2010

zindagi ye nahi to aur kya hai.......

subah ke neend ki mithaas........
dino k badalne ki jhoothi aas.........
wahi daraata dunia ka samundar..........
simatna apne andar,andar, aur andar.........
khud se hi ladna....
khud ko hi samjhaana......
ladkhadaate kadmo se chalte jaana.....
chalte jaana........
zindagi ye nahi to aur kya hai..........

diary ka ek panna......
kuch ladkiyon k naam........
ek cup chaay.....
aur ek dhalti shaam......
ek aur din......
be-maqsad,be-matlab.......
sukh ki chaah....
cigarette ki talab.........
zindagi ye nahi to aur kya hai................