लोग आये जंतर मंतर पे.....
तालियाँ पीटी,चीखे-चिल्लाए...
कैमरे के सामने उछले-कूदे,माइक पे गीत गाये.....
जोर-जोर से लगाए नारे.....
अमर रहे अन्ना हजारे........
सरकार को गालियाँ दे रहे थे जब सारे......
मुझे याद आ रहा था वो गाना.......
जिसने पाप न किया हो,वो पहला पत्थर मारे.....
आखिर जीत गयी जनता......
वर्ल्ड कप के बाद हमने फिर से दीवाली मनाई.......
ऐसा लगा कि लोकपाल ही है,भ्रष्टाचार की असली दवाई.....
हंसी-ख़ुशी ख़त्म हुआ नाटक......
फिर अगली सुबह आई.....
फिर से वही बिना टिकट ट्रेन में सफ़र..
फिर से वही बेइमानों वाली बेहयाई....
जो लोग गए थे जंतर-मंतर इस लड़ाई के लिए.....
उनमें से कई अगले दिन किसी दफ़्तर में कह रहे थे......
ये रख लो सर बच्चों की मिठाई के लिए..........