Monday, January 24, 2011

गम छोड़ो चलो कुछ और करो.......

हवा जो बजाती है कभी वो साज़ सुनो....
कान लगा के हिलते हुए पत्तों की आवाज़ सुनो.....
यूँ ही कभी बादलों को आते जाते देखो....
शरारती चाँद को कभी मुँह चिढाते देखो.......

मेरी मानो तो इन पे कभी गौर करो......
गम छोड़ो चलो कुछ और करो.......

बैठ खिड़की पे कभी चाँद से कुछ बात करो....
फ़ुर्सत हो तो सितारों से मुलाक़ात करो......
चंद लम्हों में इनसे दोस्ती हो जायेगी....
तुम और कुछ न करो,बस इक शुरुआत करो.......

मेरी मानो तो इन पे कभी गौर करो......
गम छोड़ो चलो कुछ और करो.......

ये जो मारे मारे फ़िरते हो तुम खुशियों की खोज में......
उठा कर देखा है कभी किसी बच्चे को गोद में....
ये माना कि किताबों में मिलता है बहुत कुछ.....
पर ज़िन्दगी मत खोजो तुम किताबों के बोझ में.......

मेरी मानो तो इन पे कभी गौर करो......
गम छोड़ो चलो कुछ और करो.......

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